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विस्तृत उत्तर
सृष्टि बनते समय वैकुण्ठ की भूमिका दिव्य आधार देने की थी। आदिनाद और विष्णु की प्रथम श्वास से जब भौतिक ब्रह्मांड सक्रिय हुआ, तब शाश्वत वैकुण्ठ की आधारशक्ति उससे जुड़ी। इसका अर्थ है कि सृष्टि केवल पदार्थ, जल और तत्वों से नहीं बनी, बल्कि उसे दिव्य चेतना का सहारा भी मिला। इसी से ब्रह्मांडीय रचना भगवान की व्यवस्था से जुड़ी हुई मानी गई।
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