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विस्तृत उत्तर
एकपाद विभूति भौतिक सृष्टि या प्रकट ब्रह्मांड को कहा जाता है। यह वही जगत है जिसमें जन्म, मृत्यु, समय, परिवर्तन और प्रलय का चक्र चलता है। इस कथा में शाश्वत वैकुण्ठ की आधारशक्ति को इसी एकपाद विभूति से जोड़ा गया है। इसका भाव है कि नश्वर भौतिक जगत भी दिव्य आधार से समर्थित होकर चलता है।
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