विस्तृत उत्तर
शिव का तीसरा नेत्र ज्ञान, विवेक और अंतर्दृष्टि का नेत्र है।
जब यह नेत्र खुलता है, तो अज्ञान, अंधकार और काम (सांसारिक इच्छाओं) का भस्म हो जाना निश्चित है। यह भीतर की ओर देखने की प्रेरणा देता है।
तीसरा नेत्र = ज्ञान, विवेक और अंतर्दृष्टि का नेत्र। जब यह खुलता है तो अज्ञान, अंधकार और काम (सांसारिक इच्छाएं) भस्म हो जाते हैं। यह भीतर की ओर देखने की प्रेरणा देता है।
शिव का तीसरा नेत्र ज्ञान, विवेक और अंतर्दृष्टि का नेत्र है।
जब यह नेत्र खुलता है, तो अज्ञान, अंधकार और काम (सांसारिक इच्छाओं) का भस्म हो जाना निश्चित है। यह भीतर की ओर देखने की प्रेरणा देता है।
इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ
पौराणिक पर आपको शिव का बाह्य स्वरूप और प्रतीक से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।