विस्तृत उत्तर
कामदेव ने आम के पेड़ की डाली पर चढ़कर पुष्प-धनुष से पाँच तीक्ष्ण बाण शिवजी पर छोड़े, जो शिवजी के हृदय में लगे। इससे शिवजी की समाधि टूट गयी और वे जाग गये।
जब शिवजी ने आँखें खोलकर देखा कि आम के पत्तोंमें छिपा हुआ कामदेव है, तो उन्हें बड़ा क्रोध हुआ। तीनों लोक काँप उठे।
चौपाई — 'सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका। तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा॥'
इसका अर्थ — जब आमके पत्तोंमें छिपे हुए कामदेवको देखा तो उन्हें बड़ा क्रोध हुआ, जिससे तीनों लोक काँप उठे। तब शिवजीने तीसरा नेत्र खोला, उनके देखते ही कामदेव जलकर भस्म हो गया।
कामदहन के बाद जगतमें बड़ा हाहाकार मचा — देवता डर गये, दैत्य सुखी हुए, भोगी लोग कामसुखको याद करके चिन्ता करने लगे और साधक-योगी निष्कंटक (काम-बाधा से मुक्त) हो गये।


