विस्तृत उत्तर
त्रिलोचन' का अर्थ है — तीन लोचन (नेत्र) वाले। भगवान शिव के तीन नेत्र हैं — दो सामान्य नेत्र और एक मस्तक पर तृतीय नेत्र।
तीन नेत्रों का प्रतीकात्मक अर्थ — दायाँ नेत्र = सूर्य (दिन का प्रकाश), बायाँ नेत्र = चंद्रमा (रात का प्रकाश), तृतीय नेत्र = अग्नि (दिव्य ज्ञान का प्रकाश)। इस प्रकार शिव के तीनों नेत्र समस्त सृष्टि को आलोकित करते हैं।
तृतीय नेत्र की शक्ति — शिव का तृतीय नेत्र तब खुलता है जब संसार में घोर अधर्म हो। कामदेव ने जब शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास किया तो शिव का तृतीय नेत्र खुला और कामदेव भस्म हो गए। प्रलयकाल में यही नेत्र खुलकर समस्त सृष्टि का संहार करता है।
योगिक महत्व — 'त्रिलोचन' का तृतीय नेत्र आज्ञा-चक्र का प्रतीक है जो ज्ञान और अंतर्दृष्टि का केंद्र है। शिव परम योगी हैं और उनका यह नेत्र दिव्य ज्ञान का द्योतक है।





