ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
शिव पूजा📜 शिव पुराण, रुद्राक्ष जाबालोपनिषद, पद्म पुराण2 मिनट पठन

चौदह मुखी रुद्राक्ष शिव का तीसरा नेत्र क्यों कहलाता है?

संक्षिप्त उत्तर

14 मुखी = शिव तीसरा नेत्र: शिव नेत्रों से उत्पन्न, आज्ञा चक्र जाग्रत करता है (अन्तर्दृष्टि), तीसरा नेत्र = संहार शक्ति (शत्रु-नकारात्मकता नाश), परम दुर्लभ (तीसरा नेत्र सामान्यतः बंद)। लाभ: भविष्य ज्ञान, सर्वरक्षा। 'देव मणि' कहलाता है।

📖

विस्तृत उत्तर

14 मुखी रुद्राक्ष को 'देव मणि' कहा जाता है और इसे शिव के तीसरे नेत्र (त्रिनेत्र/आज्ञा चक्र) का प्रतीक माना गया है।

शिव का तीसरा नेत्र क्यों

  1. 114 मुख = शिव के 14 लोक दृष्टि: शिव पुराण के अनुसार 14 मुखी रुद्राक्ष शिव के नेत्रों से सीधे उत्पन्न हुआ। शिव का तीसरा नेत्र = सर्वज्ञता, सर्वदृष्टि, भूत-भविष्य-वर्तमान का ज्ञान। 14 मुखी रुद्राक्ष धारक को यही दिव्य दृष्टि प्रदान करता है।
  1. 1आज्ञा चक्र जागृति: शिव का तीसरा नेत्र = आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य)। 14 मुखी रुद्राक्ष आज्ञा चक्र को जाग्रत करता है, जिससे अन्तर्दृष्टि (intuition), भविष्य का बोध और आत्मज्ञान प्राप्त होता है।
  1. 1संहार शक्ति: शिव का तीसरा नेत्र खुलता है तो संहार (विनाश) होता है — कामदेव दग्ध हुए। 14 मुखी रुद्राक्ष धारक के शत्रु और नकारात्मकता नष्ट होती है।
  1. 1परम दुर्लभता: जैसे शिव का तीसरा नेत्र सामान्यतः बंद रहता है (अत्यंत विशेष अवसर पर खुलता है), वैसे ही 14 मुखी रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ है — प्रकृति में बहुत कम मिलता है।

14 मुखी रुद्राक्ष के लाभ: भविष्य ज्ञान, सर्वरक्षा, अकाल मृत्यु निवारण, शत्रु नाश, मानसिक शक्ति, निर्णय क्षमता, आध्यात्मिक उन्नति।

धारण विधि: माथे (आज्ञा चक्र) या गले में धारण। सोमवार/शिवरात्रि पर 'ॐ नमः शिवाय' सहित अभिमंत्रित करके।

विशेष: 14 मुखी रुद्राक्ष नेपाल और इंडोनेशिया में मिलता है। अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान होने के कारण नकली बहुत मिलते हैं — प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।

📜
शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, रुद्राक्ष जाबालोपनिषद, पद्म पुराण
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

14 मुखी रुद्राक्षतीसरा नेत्रदेव मणित्रिनेत्रशिव

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

चौदह मुखी रुद्राक्ष शिव का तीसरा नेत्र क्यों कहलाता है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको शिव पूजा से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर शिव पुराण, रुद्राक्ष जाबालोपनिषद, पद्म पुराण पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।