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रुद्राक्ष📜 शिव पुराण, रुद्राक्ष परंपरा1 मिनट पठन

चौदह मुखी रुद्राक्ष शिव का तीसरा नेत्र क्यों

संक्षिप्त उत्तर

14 मुखी = शिव तीसरा नेत्र (शिव पुराण: शिव नेत्रों से उत्पन्न)। आज्ञा चक्र सक्रिय, अंतर्दृष्टि, भविष्य दृष्टि। सर्वोच्च आध्यात्मिक। दुर्लभ (₹10,000-₹2,00,000+)। माथे पर धारण।

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विस्तृत उत्तर

चौदह मुखी = देव मणि; शिव का तीसरा नेत्र (त्रिनेत्र) का प्रतिनिधित्व।

क्यों तीसरा नेत्र

  1. 114 मुखी = शिव का सर्वोच्च रूप — 14 भुवन (लोक) के स्वामी।
  2. 2शिव पुराण — 14 मुखी रुद्राक्ष शिव के नेत्रों (अश्रु) से उत्पन्न; विशेषकर तीसरे नेत्र से।
  3. 3आज्ञा चक्र — तीसरा नेत्र = आज्ञा चक्र; 14 मुखी इसे सक्रिय करता है।
  4. 4भविष्य दृष्टि — अंतर्दृष्टि, सहज ज्ञान (intuition) बढ़ाता है।

लाभ: सर्वोच्च आध्यात्मिक; बाधा/शत्रु/रोग निवारण; नेतृत्व; निर्णय शक्ति।

अत्यंत दुर्लभ और महंगा: ₹10,000-₹2,00,000+। मंत्र: 'ॐ नमः'। माथे (तीसरा नेत्र) पर धारण = सर्वोत्तम।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, रुद्राक्ष परंपरा
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