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विस्तृत उत्तर
चन्द्रशेखराष्टकम् के दूसरे श्लोक में कामदेव दहन का वर्णन है।
श्लोक 2 में कहा गया है कि शिव ने मस्तक के तीसरे नेत्र (भाललोचन) से उत्पन्न अग्नि से कामदेव के शरीर को भस्म कर दिया और उनका शरीर पवित्र भस्म से लिपा हुआ है।
चन्द्रदोष से संबंध: वासनाओं और अस्थिर इच्छाओं पर विजय; वैराग्य से मानसिक शांति की प्राप्ति।
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