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वासना से जुड़े सभी प्रश्न(7)

वासना पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 7 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

लोभ और वासना का अंत क्या होता है?

धुंधुकारी वासना और लोभ में अंधा होकर चोरी में लगा और अंत में जिनके लिये धन लाया उन्हीं के हाथ मारा गया।

#लोभ#वासना#कुसंग
लोक

अपूर्ण इच्छाओं से भूत योनि कैसे बनती है?

मृत्यु के समय अधूरी इच्छा, मोह, धन या बदले की भावना आत्मा को पृथ्वी पर रोककर भूत योनि बना देती है।

#अपूर्ण इच्छाएँ#भूत योनि#वासना
श्लोकों का अर्थ

चन्द्रशेखराष्टकम् में कामदेव दहन का क्या अर्थ है?

कामदेव दहन में शिव ने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म किया — यह वासनाओं और अस्थिर इच्छाओं पर विजय का प्रतीक है जो मानसिक शांति देता है।

#कामदेव दहन#तीसरा नेत्र#वासना
कालसर्प दोष: परिचय और कारण

राहु का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

राहु अतृप्त इच्छाओं (वासना), भ्रम और भविष्य की असीमित भौतिक आकांक्षाओं का प्रतीक है।

#राहु#आध्यात्मिक अर्थ#वासना
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को सूक्ष्म शरीर से ही क्यों रहना पड़ता है?

प्रेत को सूक्ष्म शरीर में इसलिए रहना पड़ता है क्योंकि वासनाएँ उसका शरीर बन जाती हैं, कर्म-फल भोगने के लिए यह जरूरी है, पिंडदान से 'हस्तमात्र' यातना-देह बनती है और यमराज के निर्णय तक यही संक्रमण-अवस्था है।

#प्रेत#सूक्ष्म शरीर#वासना
जीवन एवं मृत्यु

प्रेत को भूख क्यों लगती है?

प्रेत को भूख इसलिए लगती है क्योंकि वह अपनी वासनाएँ और इच्छाएँ शरीर के साथ लेकर जाता है। 'आत्मा शरीर त्यागने पर भूख-प्यास का अनुभव करती है' — यही गरुड़ पुराण का वर्णन है। पिंडदान इसे कम करता है।

#प्रेत#भूख#वासना
सनातन सिद्धांत

हिंदू धर्म में पुनर्जन्म क्यों होता है?

हिंदू धर्म में पुनर्जन्म का मुख्य कारण कर्म-बंधन, अपूर्ण वासनाएं और अज्ञान है। आत्मा अमर है — वह कर्मों का फल भोगने हेतु बार-बार नया शरीर धारण करती है; ज्ञान और मोक्ष-प्राप्ति से यह चक्र समाप्त होता है।

#पुनर्जन्म#कर्म#आत्मा
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