जीवन एवं मृत्युप्रेत को सूक्ष्म शरीर से ही क्यों रहना पड़ता है?
प्रेत को सूक्ष्म शरीर में इसलिए रहना पड़ता है क्योंकि वासनाएँ उसका शरीर बन जाती हैं, कर्म-फल भोगने के लिए यह जरूरी है, पिंडदान से 'हस्तमात्र' यातना-देह बनती है और यमराज के निर्णय तक यही संक्रमण-अवस्था है।
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