ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

श्लोकों का अर्थ प्रश्नोत्तर — 9 प्रश्न

श्लोकों का अर्थ से जुड़े 9 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 9 प्रश्न

'अखिलार्थसम्पदम्' का क्या अर्थ है?

'अखिलार्थसम्पदम्' का अर्थ है सभी प्रकार की समृद्धि — यह भौतिक (धन, संपत्ति, सफलता) और आध्यात्मिक (मुक्ति) दोनों इच्छाओं को पूर्ण करता है।

अखिलार्थसम्पदम्सम्पूर्ण संपदाभौतिक आध्यात्मिक
पूरा उत्तर पढ़ें →

'अयत्नतः' का क्या अर्थ है?

'अयत्नतः' का अर्थ है 'बिना किसी विशेष परिश्रम के' — चन्द्रशेखर श्रद्धा और सात्त्विक भावना से शरण लेने वाले भक्त को बिना परिश्रम के मुक्ति देते हैं।

अयत्नतःबिना प्रयासमुक्ति
पूरा उत्तर पढ़ें →

चन्द्रशेखराष्टकम् की फलश्रुति क्या कहती है?

फलश्रुति: जो भी इस स्तोत्र का पाठ करे उसे मृत्युभय नहीं होता — चन्द्रशेखर पूर्ण आयु, निरोगी जीवन, सम्पूर्ण संपदा और अयत्नतः (बिना प्रयास) मुक्ति देते हैं।

फलश्रुतिमृत्युभयपूर्ण आयु
पूरा उत्तर पढ़ें →

चन्द्रशेखराष्टकम् में शिव के कौन से स्वरूपों का वर्णन है?

चन्द्रशेखराष्टकम् में त्रिपुरांतक, भस्माधारी, गजचर्मधारी, नीलकण्ठ, वृषभवाहन, भेषजम्, भक्तवत्सल और विश्व सृष्टि-पालन-संहार नियंत्रक — इन स्वरूपों का वर्णन है।

शिव स्वरूपत्रिपुरांतकनीलकण्ठ
पूरा उत्तर पढ़ें →

'भव रोगिणाम भेषजम्' का क्या अर्थ है?

'भव रोगिणाम भेषजम्' का अर्थ है 'संसार रूपी रोग की औषध' — शिव समस्त भौतिक और मानसिक रोगों की औषध हैं और मन की मूलभूत अस्थिरता को दूर करते हैं।

भव रोगिणाम भेषजम्संसार रोगऔषध
पूरा उत्तर पढ़ें →

चन्द्रशेखराष्टकम् में कामदेव दहन का क्या अर्थ है?

कामदेव दहन में शिव ने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म किया — यह वासनाओं और अस्थिर इच्छाओं पर विजय का प्रतीक है जो मानसिक शांति देता है।

कामदेव दहनतीसरा नेत्रवासना
पूरा उत्तर पढ़ें →

चन्द्रशेखराष्टकम् में त्रिपुरांतक का क्या अर्थ है?

त्रिपुरांतक का अर्थ है तीनों पुरों (त्रिपुरासुर) को जलाने वाले — यह मन की अस्थिरता के मूल (अहंकार, कर्म, माया) के नाश का प्रतीक है।

त्रिपुरांतकतीन पुरत्रिपुरासुर
पूरा उत्तर पढ़ें →

'मम किं करिष्यति वै यमः' का क्या अर्थ है?

'मम किं करिष्यति वै यमः' का अर्थ है 'यमराज मेरा क्या कर सकते हैं?' — यह प्रत्येक श्लोक का अंत है जो शिव शरण में निर्भीकता की घोषणा करता है।

मम किं करिष्यतियमराजमृत्युभय
पूरा उत्तर पढ़ें →

चन्द्रशेखराष्टकम् के पहले श्लोक में क्या वर्णन है?

पहले श्लोक में त्रिपुरांतक शिव का वर्णन है जिन्होंने मेरु धनुष, वासुकी प्रत्यंचा और विष्णु बाण से त्रिपुरासुर जलाया — 'मम किं करिष्यति वै यमः' (यमराज मेरा क्या करेगा)।

पहला श्लोकत्रिपुरांतकमेरु धनुष
पूरा उत्तर पढ़ें →

श्लोकों का अर्थ — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्लोकों का अर्थ श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

श्लोकों का अर्थ को गहराई से समझने का तरीका

श्लोकों का अर्थ प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

9 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।