विस्तृत उत्तर
'मम किं करिष्यति वै यमः' का अर्थ है: 'यमराज मेरा क्या कर सकते हैं?'
यह प्रश्न प्रत्येक श्लोक के अंत में दोहराया जाता है और यह एक निर्भीकता की घोषणा है — जब साधक शिव की शरण में हो तो मृत्यु का कोई भय नहीं।
फलश्रुति (श्लोक 10) स्पष्ट रूप से यह वचन देती है कि इस स्तोत्र का पाठ करने वाले को मृत्यु का भय नहीं रहता।




