विस्तृत उत्तर
यमराज वैष्णवों को दंड क्यों नहीं देते, यह कथन अत्यंत स्पष्ट है। यमराज अपने दूत को हाथ में पाश लिये देखकर उसके कान में कहते हैं कि जो भगवान की कथा-वार्ता में मग्न हैं, उनसे दूर रहना। मैं अन्य मनुष्यों को दंड देने की शक्ति रखता हूँ, पर वैष्णवों को नहीं। यहाँ वैष्णव वह है जो भगवान की कथा में रमा हुआ है। इससे भागवत श्रवण और भगवद्कथा की महिमा प्रकट होती है। कथा में अनुरक्त व्यक्ति यमदंड के सामान्य क्षेत्र से अलग माना गया है, क्योंकि वह भगवान के आश्रय में है। यह कथन भागवत श्रवण को पाप-नाश, भक्ति और परम सुरक्षा से जोड़ता है।
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