दिव्यास्त्रब्रह्मदंड क्या है ब्रह्मा का अस्त्रब्रह्मदंड ब्रह्मा का दिव्य दंड है जो किसी भी अस्त्र को निष्प्रभावी कर देता है। वशिष्ठ के पास यह था — जब विश्वामित्र ने सेना से आक्रमण किया तब वशिष्ठ ने ब्रह्मदंड से सब कुछ निगल लिया।#ब्रह्मदंड#ब्रह्मा#वशिष्ठ
श्रीमद्भागवतआततायी का मतलब क्या है?आततायी वह है जो घोर हिंसक अपराध करे; टिप्पणी में आग लगाने वाला, विष देने वाला, हथियार लेकर हमला करने वाला आदि छह प्रकार बताए गए हैं।#आततायी#धर्म#अश्वत्थामा
श्रीमद्भागवतयमराज वैष्णवों को दंड क्यों नहीं देते?यमराज अपने दूतों से कहते हैं कि जो भगवान की कथा में मत्त हैं, उनसे दूर रहो; मैं वैष्णवों को दंड नहीं देता।#यमराज#वैष्णव#भागवत कथा
लोकसरसों का फूल तोड़ने पर लक्ष्मी जी को दंड क्यों मिला?क्योंकि वह फूल किसान के श्रम से उगा था और बिना अनुमति लिया गया था।#सरसों#दंड#लक्ष्मी
लोकलक्ष्मी जी को धरती पर दंड क्यों मिला?बिना अनुमति किसान के खेत से फूल तोड़ने के कारण उन्हें दंड मिला।#लक्ष्मी जी#दंड#धरती
मरणोपरांत आत्मा यात्रायमराज किन आयुधों को धारण करते हैं?यमराज शंख, चक्र, धनुष और दंड धारण करते हैं।#यमराज#आयुध#शंख
लोकअतल लोक और नरक में मूलभूत अंतर क्या है?अतल भोग का स्थान है — स्वर्ग से अधिक सुख, रोग-बुढ़ापा नहीं। नरक दंड का स्थान है — यातना और पीड़ा। नरक पातालों से भी नीचे है।#अतल लोक#नरक#अंतर
पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्यऋषि भृंगी को क्या दंड मिला?भृंगी को अपूर्णता का दंड मिला (शरीर से मांस और रक्त छिन गया), किंतु पार्वती के अनुनय पर शिव ने उन्हें संबल हेतु तीसरी टांग दी।#ऋषि भृंगी#दंड#तीसरी टांग
जीवन एवं मृत्युअन्न की चोरी करने वाले को किस नरक में भेजा जाता है?अन्न चोरी पर — पयू नरक (मल में), खरभोजन नरक (काँटे), भोजन न बाँटने पर कीड़ों वाला नरक। यममार्ग पर भयंकर भूख। यमदूत का उलाहना — 'अन्न का दान क्यों नहीं दिया?'#अन्न चोरी#नरक#दंड
जीवन एवं मृत्युजल की चोरी करने वाले को किस दंड का वर्णन है?जल चोरी/दुरुपयोग — यमदूत का उलाहना, यममार्ग पर भयंकर प्यास, वैतरणी में रक्त-मवाद से प्यास। 'जल-स्रोत नष्ट करने वाले को नरक।' जलदान से प्रायश्चित।#जल चोरी#वैतरणी#दंड
जीवन एवं मृत्युछल करने वाले को क्या दंड मिलता है?छल करने वाले को — तमिश्रम नरक (बार-बार पिटाई), गर्म रेत-अंगारे पर चलना, शाल्मी-वृक्ष, गुरु को धोखे पर महापातक नरक। पुनर्जन्म में उल्लू योनि।#छल#दंड#तमिश्रम
जीवन एवं मृत्युहिंसा करने वाले को क्या दंड मिलता है?हिंसा करने वाले को — कुंभीपाक नरक (खौलता तेल), क्रीमिक नरक (कीट), सूलप्रोत नरक (लोहे के शूल), तामिस्र नरक (पिटाई)। पुनर्जन्म में हिंसा का शिकार।#हिंसा#दंड#कुंभिपाक
जीवन एवं मृत्युईर्ष्या करने वाले को क्या दंड मिलता है?ईर्ष्यालु को — रौरव नरक (अग्नि-यातना), निंदा पर संधांश नरक (नाखूनों से खरोंचना), दूसरों के कलह में प्रसन्नता पर नरक। ईर्ष्यालु का जीवन दुखी — पुनर्जन्म में अभाव।#ईर्ष्या#दंड#रौरव
जीवन एवं मृत्युक्रोध करने वाले को क्या दंड मिलता है?क्रोधी को — क्रोध में हिंसा पर लोहशंकु-क्रीमिक नरक, स्त्री-पीड़न पर रौरव नरक (कष्ट कई गुना), अन्याय पर सुघोर्म नरक (खौलता तेल)। पुनर्जन्म में उसी हिंसा का शिकार।#क्रोध#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युलोभ करने वाले को क्या दंड मिलता है?लोभी को — रौरव नरक (अग्निकुंड), लोभ से जीव-हत्या पर तामिस्र नरक (पिटाई), संपत्ति हड़पने पर तमिश्रम नरक। 'अकेला ही अंधकारपूर्ण नरक में जाता है।' पुनर्जन्म में दरिद्रता।#लोभ#दंड#रौरव
जीवन एवं मृत्युअधर्म करने वाले को क्या दंड मिलता है?अधर्म करने वाले को — अंधतामिस्त्र नरक (परम अंधकार), विदीर्ण नरक (अंग-भंग), तप्तलोहमय (तपता लोहा)। मृत्यु में यमदूत पाश बाँधकर घसीटते हैं। इस जीवन में दुर्भाग्य।#अधर्म#दंड#अंधतामिस्त्र
जीवन एवं मृत्युपाप करके पछतावा न करने वाले को क्या दंड मिलता है?पाप करके पछतावा न करने वाले को — एक नरक से दूसरे नरक, दंड में कोई राहत नहीं। 'एक दुःख के बाद दूसरा दुःख।' पश्चाताप बिना मृत्युकाल का अवसर भी गँवाता है।#पछतावा#पाप#दंड
जीवन एवं मृत्युदान न करने वाले को क्या दंड मिलता है?दान न करने वाले को — यमदूत का उलाहना, यममार्ग पर भूख-प्यास, वैतरणी की गंदगी, भोजन न बाँटने पर कीड़ों वाला नरक और पुनर्जन्म में दरिद्रता।#दान न करना#दंड#वैतरणी
जीवन एवं मृत्युजल की चोरी करने वाले को क्या दंड मिलता है?जल की चोरी — यममार्ग पर भयंकर प्यास, वैतरणी में रक्त-मवाद से प्यास बुझाने को विवश। 'जल का दान क्यों नहीं दिया' — यमदूत का उलाहना। जल-स्रोत नाश पर वैतरणी।#जल चोरी#दंड#वैतरणी
जीवन एवं मृत्युभोजन की चोरी करने वाले को क्या दंड मिलता है?भोजन की चोरी — पयू नरक (मल में), हिंसा से कमाया अन्न खाने पर खरभोजन नरक (काँटे)। यमदूत का उलाहना — 'अन्न का दान क्यों नहीं दिया?' इस जीवन में भी रोग-दुर्भाग्य।#भोजन चोरी#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युपवित्र वस्तुओं का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?पवित्र वस्तुओं का अपमान — ब्राह्मण-भोजन अपमान पर लालभोजन नरक (मांस), शुद्धता का अनादर पर मल में डुबोना, मंदिर-संपत्ति हरण पर प्रेत योनि, वन-नाश पर वैतरणी।#पवित्र वस्तु#अपमान#दंड
जीवन एवं मृत्युधर्म का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?धर्म का अपमान — ईश्वर में अविश्वास पर प्रेत योनि, देव-पूजा न करने पर नरक, व्रत-तीर्थ-परित्याग पर शाल्मी-वृक्ष, धर्म का ढोंग करने पर वैतरणी, अधर्म से परिवार-पोषण पर अंधतामिस्त्र।#धर्म अपमान#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युमाता-पिता का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?माता-पिता का अपमान — इस जीवन में दुर्भाग्य-रोग। पुनर्जन्म में गर्भ में ही मृत्यु। 'माता-पिता देवताओं के समान हैं — उनका अपमान जीवन में बाधाओं का कारण है।'#माता-पिता अपमान#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युस्त्री का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?स्त्री का अपमान — सूकरमुख नरक (सूअर नोचते हैं)। स्त्री-हत्या पर चांडाल योनि। शोषण पर भयंकर रोग। परस्त्री-गमन पर प्रपतन नरक (पहाड़ से गिराना)। गर्भपात पर वैतरणी।#स्त्री अपमान#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युब्राह्मण को कष्ट देने वाले को क्या दंड मिलता है?ब्राह्मण को कष्ट देने पर — हत्या पर वैतरणी, संपत्ति-हरण पर वैतरणी, ब्राह्मण-पीड़न पर अंगारों में दंड। ब्राह्मण-कलह को प्रोत्साहित करने वाले भी नरकगामी होते हैं।#ब्राह्मण पीड़न#दंड#वैतरणी
जीवन एवं मृत्युगुरु का अपमान करने वाले को क्या दंड मिलता है?गुरु का अपमान — नरक का द्वार। कुतर्क करने वाला शिष्य ब्रह्मराक्षस योनि में, गुरु-धन हरण पर वैतरणी, गुरुपत्नी-गमन पर कुष्ठ-रोग और महापातक नरक में कीड़ों द्वारा भक्षण।#गुरु अपमान#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युधोखा देने वाले को क्या दंड मिलता है?धोखा देने वाले को — सुघोर्म नरक (खौलता तेल), गुरु को धोखे पर महापातक नरक (कीड़े)। पुनर्जन्म में उल्लू योनि। इस जीवन में भी कोई स्थायी सुख नहीं।#धोखा#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युझूठ बोलने वाले को क्या दंड मिलता है?झूठ बोलने वाले को — रौरव नरक (अग्निकुंड), झूठी गवाही वाले को शल्मली नरक (काँटेदार पेड़) और निर्भक्षण नरक (बीच से चीरना)। पुनर्जन्म में अंधापन।#झूठ#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युचोरी करने वाले को क्या दंड मिलता है?चोरी करने वाले को — सामान्य चोर को पयू नरक (मल में), छल से धन कमाने वाले को शाल्मी-वृक्ष, धरोहर हड़पने वाले को वैतरणी की यातना। पुनर्जन्म में दरिद्रता और निरंतर अभाव।#चोरी#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युहत्या करने वाले को क्या दंड मिलता है?हत्यारे को — ब्रह्महत्यारे को वैतरणी, निर्दोष-हत्यारे को लोहशंकु नरक (कीलें), गोहत्यारे को रक्त-गड्ढे में काँटे, जीव-हत्यारे को क्रीमिक नरक (कीट)। पुनर्जन्म में स्वयं उसी हिंसा का शिकार।#हत्या#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युमहापापी को क्या दंड मिलता है?महापापी को — दक्षिण द्वार से यमलोक प्रवेश, वैतरणी में घोर यातना, रौरव-महारौरव जैसे भयंकर नरक और एक नरक से दूसरे नरक में भटकना। इस जीवन में भी कष्ट और मृत्यु के बाद अत्यंत लंबा दंड-काल।#महापापी#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युक्या बड़े पापों के लिए अलग दंड होता है?हाँ। गरुड़ पुराण में 36 नरक हैं, प्रत्येक विशिष्ट पाप के लिए। बड़े पापों के लिए रौरव जैसे भयंकर नरक, अधिक अवधि और असाधारण यातना। महापाप का प्रायश्चित भी असाधारण (जैसे भूमिदान) होता है।#बड़े पाप#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युक्या छोटे पापों के लिए भी दंड मिलता है?हाँ। 'बिना भोगे कोई कर्म नष्ट नहीं होता।' चित्रगुप्त सभी छोटे-बड़े कर्मों का लेखा रखते हैं। छोटे पापों का दंड हल्का होता है परंतु होता अवश्य है। दान-व्रत-भक्ति से छोटे पापों का प्रायश्चित संभव है।#छोटे पाप#दंड#कर्मफल
जीवन एवं मृत्युपापी को कौन दंड देता है?पापी को दंड देते हैं — यमराज (न्यायकर्ता), चित्रगुप्त (लेखाकार), श्रवण-श्रवणियाँ (गुप्तचर) और यमदूत (दंड-देने वाले)। दार्शनिक स्तर पर — कर्म स्वयं ही दंड लेकर आता है।#पापी#दंड#यमराज
जीवन एवं मृत्युनरक में जीव को कौन दंडित करता है?नरक में मुख्यतः यमदूत दंड देते हैं — लोहे की लाठी, मुद्गर, गदा, मूसल से। प्रत्येक नरक में विशेष यमदूत हैं। भयंकर कुत्ते, सर्प, राक्षस भी माध्यम हैं। सर्वोच्च अधिकार यमराज का है।#नरक#दंड#यमदूत
जीवन एवं मृत्युधर्मराज जीव को दंड कैसे देते हैं?धर्मराज चित्रगुप्त के लेखे से पाप-पुण्य तौलकर नरक का निर्धारण करते हैं। गरुड़ पुराण में 84 लाख नरक हैं — हर पाप के लिए अलग नरक। यह दंड अस्थायी है — पाप-दंड पूरा होने पर पुनर्जन्म होता है।#धर्मराज#दंड#नरक
जीवन एवं मृत्युयमदूत किस प्रकार के अस्त्र धारण करते हैं?यमदूत मुख्यतः पाश (फंदा) और दंड (डंडा) धारण करते हैं। पाश से जीवात्मा को बाँधते हैं, दंड से आगे ले जाते हैं। उनके नाखून भी आयुध जैसे तीखे बताए गए हैं। नरक में मुगदर और कोड़ों का भी वर्णन है।#यमदूत#अस्त्र#पाश
आत्मा और मोक्षगरुड़ पुराण में कितने नरक बताए गए हैंभागवत पुराण (5.26) में 28, गरुड़ पुराण में 21-28 नरक वर्णित हैं। प्रमुख: तामिस्र, रौरव, कुम्भीपाक, कालसूत्र, वैतरणी आदि — प्रत्येक विशिष्ट पाप से संबंधित। हिंदू धर्म में नरक अस्थायी है — पाप भोगकर पुनर्जन्म होता है। उद्देश्य: सत्कर्म की प्रेरणा।#नरक#गरुड़ पुराण#28 नरक