विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में गुरु के प्रति अपराध को अत्यंत गंभीर पाप माना गया है।
गुरु का अपमान — नरक — 'गुरु का अपमान यानी भगवान का अपमान। ऐसा करना नरक के द्वार खोलने जैसा है।' गरुड़ पुराण में यह स्पष्ट वर्णन है।
पुनर्जन्म में — 'गरुड़ पुराण में कहा गया है कि गुरु से कुतर्क करने वाला शिष्य अगले जन्म में जल रहित वन में ब्रह्मराक्षस बनता है।' यह अत्यंत भयंकर योनि है।
गुरु-धन हरण — 'जो गुरु के धन को हरण करने वाले हैं — वे वैतरणी में महान दुःख भोग करते हैं।'
गुरुपत्नी-गमन — गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय में — 'गुरुपत्नीगामी' को महापापी कहा गया है और इसके लिए कुष्ठ-रोग का अगला जन्म बताया गया है।
महापातक नरक — 'गुरु को धोखा देने वालों को महापातक नरक में कीड़े खाते हैं।'
गरुड़ पुराण का मूल संदेश — 'गुरु, माता-पिता और देवताओं को देवताओं के समान माना गया है। उनका अपमान करना दुर्भाग्य और बाधाओं का कारण बनता है।'





