विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में ईर्ष्या को एक ऐसा दोष माना गया है जो अनेक पापों की जड़ है।
रौरव नरक — 'स्वार्थी, लालची और ईर्ष्यालु तथा दूसरों के संसाधनों पर ऐश करने वाले लोगों की आत्मा को रौरव नरक में भेजा जाता है।' ईर्ष्यालु को रौरव नरक की अग्नि-यातना मिलती है।
निंदा का दंड — 'संधांश नरक में निंदा करने वालों को नाखूनों से खरोंचा जाता है।' ईर्ष्यावश दूसरों की निंदा का यह परिणाम है।
दूसरों के कलह में आनंद — 'दूसरों के कलह से प्रसन्न होने वाले — वे अवश्य ही नरक में जाते हैं।' ईर्ष्यावश दूसरों को दुखी देखकर प्रसन्न होना भी पाप है।
इस जीवन में — ईर्ष्यालु व्यक्ति का अपना जीवन दुखी और असंतुष्ट रहता है। संतोष को गरुड़ पुराण में धर्म बताया गया है।
पुनर्जन्म में — ईर्ष्यालु का पुनर्जन्म ऐसी परिस्थितियों में होता है जहाँ वह स्वयं अभाव में हो।





