विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पाप करके पछतावा न करने वाले के लिए कठोर और दीर्घकालिक दंड का विधान है।
एक नरक से दूसरा — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में — 'सदा पापकर्मों में लगे हुए, शुभ कर्म से विमुख प्राणी एक नरक से दूसरे नरक को, एक दुःख के बाद दूसरे दुःख को तथा एक भय के बाद दूसरे भय को प्राप्त होते हैं।' पछतावे का अभाव इसका मूल कारण है।
दंड में कमी नहीं — जो पापी पश्चाताप नहीं करता, उसे राहत नहीं मिलती। दंड की अवधि और तीव्रता बनी रहती है।
मृत्यु के समय अवसर गँवाना — 'मृत्यु के समय जो भगवान का नाम लेता है वह मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है।' पश्चाताप न करने वाले को यह अवसर भी नहीं मिलता।
गरुड़ पुराण का संदेश — 'नरक का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि करना है। जब तक पाप का फल भुगता न जाए — आत्मा नरक में रहती है।' पछतावे के बिना यह अवधि और लंबी हो जाती है।



