विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में धर्म का अपमान करने और धर्म-विमुख रहने को अत्यंत गंभीर पाप माना गया है।
ईश्वर में अविश्वास — गरुड़ पुराण में — 'ईश्वर में विश्वास नहीं करता — ऐसा व्यक्ति प्रेत योनि में अवश्य जाता है।'
देव-पूजा न करना — 'जो मन्द पुरुष भगवान शिव, भगवती शक्ति, नारायण, सूर्य, गणेश, सद्गुरु और विद्वान की पूजा नहीं करते, वे नरक में जाते हैं।'
व्रत-तीर्थ का परित्याग — 'व्रत तथा तीर्थ का परित्याग करने वाले — ये वैतरणी तटस्थित शाल्मी-वृक्ष में जाते हैं।'
धर्म का ढोंग — 'धर्म पालन का ढोंग करने वाले — ये वैतरणी में दुःख भोगते हैं।' धर्म में पाखंड स्वयं पाप है।
अधर्म से परिवार-पोषण — 'जो व्यक्ति अधर्म से कुटुम्ब के भरण-पोषण के लिए प्रयत्नशील है, वह अंधतामिस्त्र नामक नरक में जाता है।'





