विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में दंड देने वाले की व्यवस्था स्पष्ट रूप से वर्णित है।
यमदूत — नरक में दंड देने का मुख्य कार्य यमदूत करते हैं। गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'अत्यंत घोर यमदूतों द्वारा मुगदरों से पीटे जाते हुए पापी रक्त वमन करते हैं।' ये यमदूत लोहे की लाठी, मुद्गर, भाला, गदा और मूसल से दंड देते हैं।
नरक के विशेष दंडकर्मी — गरुड़ पुराण में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक नरक में अनेक यमदूत हैं जो उस नरक के विशेष दंड देने में निपुण हैं। 'ये नरक अनेकों प्रकार की यातनाओं से भरे हुए हैं और इनमें एक नहीं बल्कि कई यमदूत हैं।'
जीव-जंतु — अनेक नरकों में भयंकर कुत्ते, सर्प, बिच्छू और राक्षस भी दंड देते हैं। ये यमराज के शासन के अधीन उपकरण हैं।
प्रकृति स्वयं — कुछ नरकों में अग्नि, बर्फ, जल और वायु स्वयं दंड का माध्यम बनते हैं।
उच्चतम अधिकार — यमराज का अधिकार सर्वोच्च है। उनकी आज्ञा के बिना कोई यातना नहीं दी जाती और उनके निर्देशानुसार ही सभी दंडकर्मी कार्य करते हैं।





