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यमदूत से जुड़े सभी प्रश्न(76)

यमदूत पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 76 प्रश्न उपलब्ध हैं।

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गरुड़ पुराण में पापियों के यमलोक मार्ग का वर्णन कैसे है?

गरुड़ पुराण में पापियों का 86,000 योजन का यमलोक मार्ग अत्यंत भयंकर है — जलती रेत, वैतरणी नदी, यमदूतों के कोड़े। पुण्यात्मा के लिए यही मार्ग सुलभ हो जाता है।

#गरुड़ पुराण#पापी#यमलोक
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गरुड़ पुराण में अजामिल का उदाहरण क्यों दिया गया है?

अजामिल ने मृत्यु के समय अपने पुत्र 'नारायण' को पुकारा था। भगवान के नाम के प्रभाव से विष्णुदूत प्रकट हुए और यमदूतों से बचाकर वैकुंठ भेजा। यह नाम-महिमा का प्रमाण है।

#अजामिल#गरुड़ पुराण#नारायण नाम
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मृत्यु के बाद स्वर्ग कैसे जाते हैं?

पुण्यात्मा के लिए मृत्यु के बाद स्वर्ग का मार्ग सुगम होता है। मृत्यु के समय शालग्राम रखना, तुलसी दल और भगवान का नाम लेना स्वर्ग प्राप्ति में सहायक है।

#मृत्यु#स्वर्ग#यात्रा
दिव्यास्त्र

मृत्यु के समय तुलसी रखने से क्या होता है?

मृत्यु के समय सिरहाने तुलसी या मुख में तुलसी पत्ता होने पर यमदूत आत्मा को नहीं ले जाते और स्वयं यमराज भी उस आत्मा को प्रणाम करते हैं।

#तुलसी#मृत्यु#यमदूत
दिव्यास्त्र

मृत्यु के बाद पापी आत्मा को क्या भोगना पड़ता है?

पापी आत्मा को यमदूत शरीर से खींचते हैं, गर्म रेत-नुकीले पत्थरों के कष्टदायक मार्ग से यमलोक ले जाते हैं, फिर कर्मों के आधार पर यमराज नरक का दण्ड देते हैं।

#पापी आत्मा#यमलोक#यमदूत
लोक

त्रयोदशी को काकबली क्यों दी जाती है?

कौवा यमदूत और पितृ प्रतीक है।

#काकबली#कौवा#यमदूत
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एकादशी श्राद्ध में वस्त्र दान क्यों?

यममार्ग में सहायता के लिए।

#वस्त्र दान#गरुड़ पुराण#यमदूत
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एकादशी श्राद्ध में काक बलि क्यों?

कौआ पितृ संदेशवाहक माना गया है।

#काक बलि#कौआ#यमदूत
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नवमी श्राद्ध में श्वान बलि क्यों दी जाती है?

यमदूतों की तुष्टि के लिए।

#श्वान बलि#यमदूत#पंचबलि
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श्वानबलि क्यों देते हैं?

यमराज के श्वान श्याम और शबल के लिए श्वानबलि दी जाती है।

#श्वानबलि#यमदूत#श्याम शबल
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विष्णु भक्तों को यमदूत क्यों नहीं ले जाते?

विष्णु भक्तों पर यमराज का अधिकार नहीं होता; उन्हें यमदूत नहीं, विष्णुदूत सीधे वैकुण्ठ ले जाते हैं।

#विष्णु भक्त#यमदूत#वैष्णव
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तामिस्र नरक किस पाप के लिए है?

तामिस्र नरक दूसरों का धन, स्त्री या संपत्ति छीनने वालों के लिए है, जहाँ यमदूत कालपाश में बांधकर पीटते हैं।

#तामिस्र नरक#नरक#भागवत पुराण
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पापी आत्मा वैतरणी नदी कैसे पार करती है?

बिना गोदान वाली पापी आत्मा वैतरणी में डूबती-उतराती है और यमदूत उसे त्रिशूलों से नदी में धकेलते हैं।

#पापी आत्मा#वैतरणी#यमदूत
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यममार्ग में आत्मा को कौन-कौन से कष्ट होते हैं?

यममार्ग में आत्मा को तपती रेत, भूख-प्यास, हिंसक जीवों की पीड़ा, यमदूतों के कोड़े और परिवार-वियोग का दुख सहना पड़ता है।

#यममार्ग कष्ट#पापी आत्मा#गरुड़ पुराण
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यममार्ग पापी आत्मा के लिए इतना कठिन क्यों होता है?

यममार्ग पापी आत्मा के लिए इसलिए कठिन है क्योंकि वहाँ तपती बालू, भूख-प्यास, अंधकार, हिंसक जीव और यमदूतों के कोड़े मिलते हैं।

#यममार्ग#पापी आत्मा#यमदूत
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पापी आत्मा यमदूतों को देखकर क्यों डरती है?

पापी आत्मा यमदूतों के विकराल रूप, काल-पाश, त्रिशूल और दंड को देखकर भय से कांप उठती है।

#पापी आत्मा#यमदूत#मृत्यु
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यमदूत आत्मा को दक्षिण दिशा में क्यों ले जाते हैं?

यमलोक ब्रह्मांड के दक्षिणी भाग में है, इसलिए यमदूत आत्मा को दक्षिण दिशा के यममार्ग से ले जाते हैं।

#यमदूत#दक्षिण दिशा#यममार्ग
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अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर अंगूठे के आकार की वह देह है जिसे यमदूत शरीर से निकालते हैं और जिससे आत्मा यातनाएँ भोगती है।

#अंगुष्ठमात्र#सूक्ष्म शरीर#यातना देह
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यमदूत आत्मा को शरीर से कैसे निकालते हैं?

यमदूत अंगुष्ठमात्र सूक्ष्म शरीर को स्थूल शरीर से बलपूर्वक खींच निकालकर काल-पाश में बांधते हैं।

#यमदूत#आत्मा#सूक्ष्म शरीर
लोक

मृत्यु के समय पापी को यमदूत कैसे दिखाई देते हैं?

पापी को मृत्यु के समय विकराल, लाल आँखों वाले, भयानक मुख वाले यमदूत दिखाई देते हैं, जिन्हें देखकर वह भय से कांप उठता है।

#मृत्यु समय#यमदूत#पापी आत्मा
लोक

यमदूत कौन हैं?

यमदूत यमराज के दंडाधिकारी हैं, जो मृत्यु के बाद पापी आत्मा को यमलोक तक ले जाते हैं।

#यमदूत#यमराज#मृत्यु
लोक

यमराज वैष्णव भक्तों पर अधिकार क्यों नहीं रखते?

वैष्णव भक्त अपने कर्म भगवान विष्णु को अर्पित करते हैं, इसलिए उन पर यमराज का अधिकार नहीं होता और विष्णुदूत उन्हें वैकुण्ठ ले जाते हैं।

#यमराज#वैष्णव भक्त#विष्णु भक्त
लोक

मृत्यु के बाद आत्मा यमलोक क्यों जाती है?

आत्मा मृत्यु के बाद अपने कर्मों का न्याय और फल प्राप्त करने के लिए यमलोक जाती है।

#मृत्यु के बाद#आत्मा#यमलोक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दक्षिण द्वार से पापी आत्मा को कैसे ले जाया जाता है?

यमदूत पापी आत्मा को दक्षिण द्वार से घसीटकर यमपुरी में ले जाते हैं।

#दक्षिण द्वार#पापी आत्मा#यमदूत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पापी आत्माएँ यमपुरी में किस द्वार से प्रवेश करती हैं?

पापी आत्माएँ यमपुरी में भयंकर दक्षिण द्वार से प्रवेश करती हैं।

#पापी आत्मा#यमपुरी#दक्षिण द्वार
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

वैतरणी नदी पार न कर पाने पर आत्मा को क्या होता है?

गोदान न होने पर आत्मा वैतरणी में धकेली जाती है और पीड़ा सहते हुए तैरकर पार करती है।

#वैतरणी नदी#गोदान#आत्मा कष्ट
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूत आत्मा को हर नगर से आगे क्यों धकेलते हैं?

विश्राम और श्राद्ध पिण्ड के बाद यमदूत आत्मा को अगले नगर की ओर आगे बढ़ाते हैं।

#यमदूत#16 पुरियाँ#यममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

आत्मा को गले में पाश से बाँधकर क्यों ले जाया जाता है?

गले में पाश से बाँधना यमदूतों द्वारा आत्मा को यममार्ग पर ले जाने का वर्णन है।

#पाश#यमदूत#गला
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को कैसे ले जाते हैं?

तेरहवें दिन यमदूत आत्मा को गले में पाश से बाँधकर यममार्ग की ओर खींचते हैं।

#तेरहवाँ दिन#यमदूत#पाश
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तेरहवें दिन आत्मा के साथ क्या होता है?

तेरहवें दिन आत्मा घर से संबंध छोड़कर यमदूतों के अधीन यममार्ग की यात्रा पर निकलती है।

#तेरहवाँ दिन#यमदूत#यममार्ग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गोदान न होने पर आत्मा वैतरणी कैसे पार करती है?

गोदान न होने पर आत्मा रक्त और मवाद से भरी वैतरणी को कष्टपूर्वक तैरकर पार करती है।

#गोदान न होना#वैतरणी#कष्ट
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों को पिण्ड का भाग क्यों दिया जाता है?

यमदूतों को पिण्ड का भाग इसलिए दिया जाता है ताकि वे संतुष्ट रहें और प्रेत को अकारण कष्ट न दें।

#यमदूत#पिण्डदान#तृतीय भाग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्ड का तीसरा भाग किसे मिलता है?

पिण्ड का तीसरा भाग यमराज के अनुचरों यानी यमदूतों को मिलता है।

#पिण्ड का तीसरा भाग#यमदूत#यमराज
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूत आत्मा को किससे बाँधते हैं?

यमदूत आत्मा को पाश यानी रस्सी से बाँधते हैं।

#यमदूत#पाश#आत्मा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद पापी आत्मा किसे देखती है?

पापी आत्मा मृत्यु के बाद भयंकर यमदूतों को देखती है।

#पापी आत्मा#यमदूत#मृत्यु के बाद
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों को देखकर पापी जीव क्या करता है?

यमदूतों को देखकर पापी जीव भय से मल-मूत्र त्याग देता है।

#यमदूत#पापी जीव#भय
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

भागवत पुराण में यमदूतों का वर्णन कैसे है?

भागवत पुराण में यमदूतों को भयंकर, उग्र दृष्टि वाले और पापी जीव को भयभीत करने वाला बताया गया है।

#भागवत पुराण#यमदूत#मृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

यमदूतों का स्वरूप कैसा बताया गया है?

यमदूत भयंकर, उग्र और क्रोध से भरी आँखों वाले बताए गए हैं।

#यमदूत#स्वरूप#भयंकर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के समय यमदूत कब आते हैं?

जब प्राण कंठ में अवरुद्ध होते हैं, तब पापी जीव के सामने यमदूत आते हैं।

#यमदूत#मृत्यु#प्राण
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्राण कंठ में रुकने पर क्या होता है?

प्राण कंठ में रुकने पर चेतना सिमटती है और पापी जीव को यमदूत दिखाई देते हैं।

#प्राणोत्क्रमण#कंठ#यमदूत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पापी जीव को यातना देह क्यों मिलती है?

पापी जीव को अपने कर्मों के अनुसार यममार्ग और नरक की यातनाएँ सहने के लिए यातना देह मिलती है।

#पापी जीव#यातना देह#यमदूत
तुलसी विवाह परिचय

तुलसी को भगवान विष्णु ने क्या वरदान दिया?

विष्णु का वरदान: (1) वृंदा 'तुलसी' रूप में उत्पन्न होगी — त्रिलोकी में सर्वाधिक पूजनीय, (2) बिना तुलसी-दल के विष्णु की कोई पूजा, नैवेद्य या यज्ञ स्वीकार्य नहीं, (3) जहाँ तुलसी का वास = यमदूत प्रवेश नहीं कर सकते।

#तुलसी वरदान#विष्णु प्रिया#पूजा में अनिवार्य
माला के प्रकार और देवता

तुलसी माला का माहात्म्य क्या है?

तुलसी माला से सात्विकता, भक्ति और वैराग्य बढ़ता है, मन-शरीर शुद्ध होते हैं। पद्म पुराण: जिसके कंठ में तुलसी माला हो उसे यमदूत भी स्पर्श नहीं कर सकते।

#तुलसी माहात्म्य#सात्विकता भक्ति#यमदूत
जीवन एवं मृत्यु

अतिथि का अपमान करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

अतिथि-अपमान पर — घोर नरक, वैतरणी। यमदूत का उलाहना — 'अतिथि को नमस्कार नहीं किया।' 'भूखे अतिथि को लौटाने वाला नरकगामी।' बुजुर्ग-अपमान पर आग में खाल निकलने तक दंड।

#अतिथि अपमान#नरक#यमदूत
जीवन एवं मृत्यु

वस्त्रदान का क्या महत्व है?

गरुड़ पुराण में वस्त्रदान मृत्यु से पहले करने योग्य महत्वपूर्ण दानों में है। यमदूतों को प्रसन्न करता है, यममार्ग पर सहायक है और श्राद्ध में वस्त्र देने से पितरों को तृप्ति मिलती है।

#वस्त्रदान#महत्व#यमदूत
जीवन एवं मृत्यु

अन्नदान का क्या महत्व है?

गरुड़ पुराण में यमदूत पापियों से 'जल और अन्न का दान न देने' का उलाहना देते हैं। अन्नदान से यममार्ग पर भोजन मिलता है और प्रेत-पितरों को तृप्ति मिलती है। 'अन्नदानं परं दानम्' — सनातन का यह वचन गरुड़ पुराण का सार है।

#अन्नदान#महत्व#यमदूत
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को कहाँ ले जाया जाता है?

नरक में जीव को — यमराज के दरबार में → नरक दर्शन → वापस मृत्युलोक → तेरहवें दिन पुनः → वैतरणी → दक्षिण द्वार → कर्मानुसार नरक में ले जाया जाता है। एक नरक से दूसरे नरक की यात्रा भी होती है।

#नरक#यात्रा#यमदूत
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को कौन दंडित करता है?

नरक में मुख्यतः यमदूत दंड देते हैं — लोहे की लाठी, मुद्गर, गदा, मूसल से। प्रत्येक नरक में विशेष यमदूत हैं। भयंकर कुत्ते, सर्प, राक्षस भी माध्यम हैं। सर्वोच्च अधिकार यमराज का है।

#नरक#दंड#यमदूत
जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को कौन निर्देश देता है?

नरक में यमराज की आज्ञा सर्वोच्च निर्देश है। नरक के विशेष यमदूत जीव को यातना देने का कार्य करते हैं और उसके पापों की याद दिलाते हैं। चित्रगुप्त के लेखे पर आधारित यमराज का निर्देश अटल है।

#नरक#यमदूत#निर्देश
जीवन एवं मृत्यु

धर्मराज के आदेश को कौन लागू करता है?

धर्मराज के आदेश को यमदूत लागू करते हैं — यममार्ग पर ले जाना, नरक पहुँचाना, यातना देना। नरक में विशेष यमदूत होते हैं। द्वारपाल 'धर्मध्वज' प्रवेश की व्यवस्था करते हैं। सभी यमराज की आज्ञा के अधीन हैं।

#धर्मराज#यमदूत#आदेश
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