विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के प्रेत खंड में पापियों के यमलोक मार्ग का अत्यंत भयंकर और विस्तृत वर्णन है। गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्युलोक और यमलोक के मध्य की कुल दूरी 86,000 योजन है। साधारण और पापी जीवों के लिए यह मार्ग अत्यंत भयंकर और कष्टदायक होता है। यमदूतों के पाश में बंधे पापी जीवों को जलती हुई रेत, भयंकर अंधकार, प्यास और भयंकर 'वैतरणी' नदी का सामना करना पड़ता है। यमदूत उन्हें कोड़े मारते हुए ले जाते हैं और आत्मा बार-बार गिरती और उठती है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि जो लोग अपने मित्रों, अतिथियों और परिवार के सामने अकेले ही स्वादिष्ट भोजन खाते हैं उन्हें नरक में जलते हुए अंगारे चबाने पड़ते हैं। इसके विपरीत पुण्यात्माओं के लिए यह मार्ग सुलभ और बाधारहित हो जाता है।
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