विस्तृत उत्तर
यममार्ग में पापी आत्मा को अनेक भयंकर कष्ट होते हैं। मार्ग अत्यंत दुर्गम, अंधकारमय और भयानक है। इस मार्ग पर न छाया है, न जल और न अन्न। पापी आत्मा के लिए प्रलय काल के समान अनेक सूर्य चमकते रहते हैं, जिनकी तपन से बालू उबलती रहती है और आत्मा के पाँव गर्म रेत में जलते हैं, जिससे बड़े-बड़े छाले पड़ जाते हैं। भयंकर श्वान, भेड़िये और कौवे आत्मा को नोचते हैं। प्यास से व्याकुल होकर जब आत्मा जल मांगती है, तो यमदूत उसे कोड़े मारते हैं। आत्मा अपने पुराने सुखों और परिवार को याद कर रोती है, तब यमदूत उसे ताना मारते हैं कि उसका धन और परिवार कहाँ गया, अब अपने कर्मों का फल भोगो।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक

