विस्तृत उत्तर
मृत्यु के बाद जीवात्मा अपने कर्मों का फल भोगने हेतु यमलोक जाती है। यमलोक वह पारलौकिक न्याय क्षेत्र है जहाँ जीवों के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन होता है। पापी आत्माओं को यमदूत मृत्यु के पश्चात काल-पाश में बाँधकर यममार्ग से यमराज की सभा में ले जाते हैं। वहाँ चित्रगुप्त अग्रसंधानी पुस्तिका खोलकर उस जीव के संपूर्ण जीवन का कर्म-वृत्तांत सुनाते हैं। इसी कर्म-वृत्तांत के आधार पर यमराज निर्णय सुनाते हैं कि आत्मा को किस नरक में कितनी यातना भोगनी है या किस पुण्य के प्रभाव से उसे कौन सा उच्च लोक प्राप्त होगा।
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