विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु ने वृंदा को यह वरदान दिया कि वह इस भौतिक शरीर को त्यागने के पश्चात 'तुलसी' के रूप में उत्पन्न होगी और त्रिलोकी में सर्वाधिक पूजनीय होगी।
शालिग्राम रूप में भगवान विष्णु सदैव उसके साथ रहेंगे और बिना तुलसी-दल के भगवान विष्णु की कोई भी पूजा, नैवेद्य या यज्ञ कभी भी स्वीकार्य नहीं होगा।
स्कंद पुराण में इस बात की पुष्टि की गई है कि जहाँ तुलसी का वास होता है, वहाँ यम के दूत प्रवेश नहीं कर सकते।





