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विस्तृत उत्तर
पापी आत्मा यमदूतों के विकराल स्वरूप को देखते ही भय से कांपने लगती है। यमदूत बिना किसी दया के जीवात्मा के सूक्ष्म शरीर को, जिसे शास्त्रों में अंगुष्ठमात्र यानी अंगूठे के आकार का कहा गया है, स्थूल शरीर से बलपूर्वक खींच निकालते हैं। जीवात्मा अपने परिजनों को रोता-बिलखता देखती है और वापस अपने शरीर में प्रवेश करना चाहती है, परंतु यमदूत उसे काल-पाश में बांधकर और गालियां देते हुए, डराते-धमकाते हुए बलपूर्वक दक्षिण दिशा के यममार्ग की ओर खींच ले जाते हैं।
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