का सरल उत्तर
विष्णु का वरदान: (1) वृंदा 'तुलसी' रूप में उत्पन्न होगी — त्रिलोकी में सर्वाधिक पूजनीय, (2) बिना तुलसी-दल के विष्णु की कोई पूजा, नैवेद्य या यज्ञ स्वीकार्य नहीं, (3) जहाँ तुलसी का वास = यमदूत प्रवेश नहीं कर सकते।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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