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विस्तृत उत्तर
यममार्ग की 16 पुरियों में आत्मा को प्रत्येक नगर में आधा मुहूर्त विश्राम मिलता है। वह वहाँ पृथ्वी पर परिजनों द्वारा किए गए मासिक श्राद्ध का पिण्ड ग्रहण करती है और क्षणिक संतृप्ति अनुभव करती है। परंतु यह सुख स्थायी नहीं होता। आधा मुहूर्त विश्राम के बाद यमदूतों के तर्जन और प्रहार से उसका हृदय फिर काँपने लगता है और उसे अगले नगर की ओर प्रस्थान कराना पड़ता है। आत्मा को यमराज की पुरी तक 348 दिनों की यात्रा पूरी करनी होती है।
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