विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्युलोक और यमलोक के मध्य की कुल दूरी 86,000 योजन है। साधारण और पापी जीवों के लिए यह मार्ग अत्यंत भयंकर और कष्टदायक होता है जहाँ यमदूत उन्हें पाश में बाँधकर ले जाते हैं और भयंकर वैतरणी नदी का सामना करना पड़ता है। यमदूत उन्हें कोड़े मारते हुए ले जाते हैं और आत्मा बार-बार गिरती और उठती है। परंतु जिन व्यक्तियों ने जीवन में धर्म का पालन किया और दान-यज्ञ किए उनके लिए यह मार्ग सुलभ और बाधारहित हो जाता है। मृत्यु के समय की मनःस्थिति का भी बड़ा महत्व है। मृत्युशैया पर पड़े व्यक्ति के निकट शालग्राम शिला रखनी चाहिए, तुलसी दल रखना चाहिए और भगवान विष्णु के दस अवतारों का स्मरण करना चाहिए। जो व्यक्ति मृत्यु के समय भगवान का नाम लेता है उसके करोड़ों महापाप तत्काल भस्म हो जाते हैं।
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