विस्तृत उत्तर
जब सती वृंदा को भगवान विष्णु के छल का भान हुआ, तो उसने अत्यंत क्षुब्ध और संतप्त होकर भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि वे पाषाण (शालिग्राम) में परिवर्तित हो जाएँ और उन्हें अपनी पत्नी के वियोग का दुःख सहना पड़े।
भगवान विष्णु ने उसके पातिव्रत्य और अनन्य भक्ति का सम्मान करते हुए उस श्राप को सहर्ष स्वीकार किया।





