विस्तृत उत्तर
विष्णु जी शालिग्राम रूप में वृंदा के श्राप और अपने प्रायश्चित के कारण प्रतिष्ठित हुए। वृंदा ने उन्हें श्राप दिया कि जिस प्रकार उन्होंने कठोर हृदय होकर उसका सतीत्व भंग किया, उसी प्रकार वे पाषाण बनेंगे। भगवान विष्णु ने इस श्राप को स्वीकार किया। बाद में उन्होंने वरदान दिया कि वे नेपाल की गंडकी नदी में शालिग्राम शिला के रूप में पूजे जाएँगे। इन काले, चक्र-चिह्नित पत्थरों को विष्णु का साक्षात स्वरूप माना जाता है। यह केवल दंड नहीं, बल्कि वृंदा की भक्ति और विष्णु के प्रायश्चित का पवित्र प्रतीक है।
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