विस्तृत उत्तर
गंडकी नदी और शालिग्राम का संबंध भगवान विष्णु के पाषाण रूप से है। वृंदा के श्राप को स्वीकार करते हुए विष्णु ने कहा कि वे गंडकी नदी के क्षेत्र में शालिग्राम शिला रूप में पूजे जाएँगे। नेपाल की गंडकी या नारायणी नदी से प्राप्त काले, चक्र-चिह्नित पत्थरों को शालिग्राम कहा जाता है। वैष्णव परंपरा में यह माना जाता है कि वज्रकीट नामक दिव्य कीट इन शिलाओं पर चक्र-चिह्न बनाता है। शालिग्राम को विष्णु का साक्षात स्वरूप मानकर पूजा जाता है। तुलसी दल के साथ शालिग्राम पूजा को विशेष पुण्यकारी माना गया है।
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