विस्तृत उत्तर
हिंदू विवाह में 'सप्तपदी' (सात कदम साथ चलना) और वेदी की सात परिक्रमाओं (फेरे) का सर्वोच्च वैधानिक महत्व है। इसके बिना विवाह पूर्ण नहीं माना जाता।
चूँकि शालिग्राम चलायमान विग्रह हैं और तुलसी का पौधा एक स्थान (वृंदावन या गमले) पर स्थिर है, अतः यजमान (अथवा पुरोहित) भगवान शालिग्राम के विग्रह (सिंहासन) को दोनों हाथों में सम्मानपूर्वक उठाकर तुलसी जी की सात बार परिक्रमा (प्रदक्षिणा) करते हैं।
परिक्रमा पूर्ण होने के पश्चात भगवान शालिग्राम को माता तुलसी के दाईं ओर से हटाकर बाईं ओर स्थापित किया जाता है, जो पत्नी के रूप में वामांगी होने का प्रतीक है। तदुपरांत शालिग्राम जी की ओर से माता तुलसी की माँग में सिंदूर अर्पण किया जाता है।





