विस्तृत उत्तर
वाहन के अग्र भाग (बोनट) पर रोली और सिंदूर से स्वस्तिक बनाया जाता है। इसके पीछे गहरे शास्त्रीय अर्थ हैं:
— स्वस्तिक की चार भुजाएं चारों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और केंद्र बिंदु 'ब्रह्म' का प्रतीक है।
— स्वस्तिक के चारों ओर चार बिंदु 'धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष' (चतुर्वर्ग) के प्रतीक हैं।
— स्वस्तिक के ऊपर 'ॐ' और दाएं-बाएं 'शुभ-लाभ' या 'श्री' लिखना यांत्रिक चेतना को जाग्रत करता है।
स्वस्तिक शब्द 'सु + अस्ति' से बना है जिसका अर्थ है 'शुभ हो' या 'कल्याण हो।' यह प्रतीक वाहन को चारों दिशाओं से दैवीय सुरक्षा प्रदान करता है।





