विस्तृत उत्तर
कन्यादान के पश्चात भगवान विष्णु (शालिग्राम) और माता तुलसी के मध्य सूती धागे (मौली या कलावा) अथवा पीले और लाल वस्त्र (पीतांबर और चुनरी) से ग्रंथि-बंधन (गठबंधन) किया जाता है।
यह बंधन पुरुष और प्रकृति के मध्य उस अविच्छेद्य संबंध को दर्शाता है जिसे कोई लौकिक शक्ति तोड़ नहीं सकती।
इसी समय पाणिग्रहण संस्कार का भाव करते हुए शालिग्राम जी का स्पर्श तुलसी जी से कराया जाता है।





