विस्तृत उत्तर
वाहन-पूजन का आरंभ स्वयं की शुद्धि से होता है। 'न देवो देवमर्चयेत्' — स्वयं देव-तुल्य बने बिना देवता की पूजा नहीं की जा सकती।
आत्म-शुद्धि और पवित्रीकरण:
हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करना चाहिए और 'पुंडरीकाक्ष' का स्मरण करना चाहिए।
मंत्र: 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥'
इस मंत्र का अर्थ है कि भगवान विष्णु के स्मरण मात्र से व्यक्ति और वस्तु दोनों पवित्र हो जाते हैं। इसके पश्चात वाहन पर गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए।
इसके बाद संकल्प लेना चाहिए — हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर वर्तमान समय, स्थान और अपने कुल का उच्चारण करते हुए वाहन सुरक्षा और सुख के लिए प्रतिज्ञा करनी चाहिए।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





