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पूजा विधि📜 गंगा पुराण, धर्म सिंधु — गंगाजल उपयोग विधि1 मिनट पठन

पूजा में गंगाजल का उपयोग कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

गंगाजल उपयोग: आचमन (3 बार दाहिनी हथेली में), सामान्य जल में एक बूँद मिलाएं, मूर्ति अभिषेक, पूजा स्थान छिड़काव, कलश में। ताँबे के बर्तन में रखें — वर्षों शुद्ध। गंगा पुराण: 'स्पर्श मात्र से पाप नष्ट।'

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विस्तृत उत्तर

गंगाजल के उपयोग की विधि गंगा पुराण और धर्म सिंधु में वर्णित है:

पूजा में गंगाजल के उपयोग

1आचमन

पूजा आरंभ में — दाहिनी हथेली में तीन बार गंगाजल लेकर पीएं। यह आंतरिक शुद्धि है।

2सामान्य जल में मिलाना

साधारण जल में एक बूँद गंगाजल मिलाने से वह पवित्र हो जाता है। 'अत्र गंगां च यमुनाम्' — यह विधि सभी पूजाओं में मान्य है।

3मूर्ति/शिवलिंग अभिषेक

गंगाजल से अभिषेक — सर्वोत्तम। विशेषतः शिवलिंग, शालिग्राम।

4पूजा स्थान और पात्र शुद्धि

पूजा घर में छिड़कने से स्थान शुद्ध।

5कलश स्थापना

कलश में गंगाजल अनिवार्य।

6प्रसाद में

प्रसाद बनाने में या प्रसाद में एक बूँद गंगाजल।

गंगाजल संरक्षण

  • ताँबे के बर्तन में
  • ढककर रखें
  • स्वच्छ स्थान पर
  • वर्षों तक शुद्ध रहता है

गंगा पुराण

गंगाजलं स्पृष्ट्वा पापं नश्यति तत्क्षणात्।' — गंगाजल का स्पर्श मात्र पाप नष्ट करता है।
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शास्त्रीय स्रोत
गंगा पुराण, धर्म सिंधु — गंगाजल उपयोग विधि
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