विस्तृत उत्तर
अग्नि की स्थापना कर हवन किया जाता है। हवन में 'पुरुष सूक्त' के मंत्रों अथवा द्वादशाक्षर मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) से खीर, मधु, घी तथा तिल मिश्रित सामग्री की 108 आहुतियाँ दी जाती हैं।
हवन के पश्चात् सपरिवार कर्पूर और शुद्ध घी के दीप से माता तुलसी और शालिग्राम जी की मंगल आरती उतारी जाती है।





