विस्तृत उत्तर
तुलसी विवाह की संपूर्ण विधि निम्नलिखित चरणों में संपन्न होती है:
१. पवित्रीकरण एवं स्वस्तिवाचन: 'ॐ अपवित्र: पवित्रो वा...' मंत्र से शुद्धि, त्रियाचमन और स्वस्तिवाचन।
२. गणेश-अंबिका, नवग्रह एवं कलश पूजन: निर्विघ्नता के लिए गणेश पूजन, कलश स्थापना और नवग्रह पूजन।
३. महा-संकल्प: देश-काल, गोत्र और नाम का उच्चारण कर विवाह का संकल्प।
४. शालिग्राम एवं तुलसी षोडशोपचार पूजन: पंचामृत अभिषेक, वस्त्र, चंदन, पुष्प आदि सोलह उपचार।
५. देवोत्थान: जाग्रत मंत्र से भगवान विष्णु का आवाहन।
६. कन्यादान (वन-दान): शास्त्रोक्त श्लोकों के साथ तुलसी का शालिग्राम को समर्पण।
७. ग्रंथि-बंधन (गठबंधन): मौली या पीत-लाल वस्त्र से बंधन।
८. सप्तपदी (सात फेरे): शालिग्राम को तुलसी की सात परिक्रमा।
९. सिंदूर अर्पण: तुलसी की माँग में सिंदूर।
१०. मंगलाष्टक पाठ।
११. हवन, आरती और क्षमा-प्रार्थना।
१२. नैवेद्य और दान।





