विस्तृत उत्तर
विवाह पूर्ण होने की घोषणा और सर्व-मंगल की कामना हेतु पंडितों या यजमान द्वारा 'मंगलाष्टक' का सस्वर पाठ किया जाता है।
अथ मंगलाष्टक मंत्र' के इन आठ श्लोकों में त्रिदेव, नवग्रह, पवित्र नदियाँ, पर्वत और महर्षियों का आवाहन कर वर-वधू (तुलसी-शालिग्राम) के लिए मंगल की याचना की जाती है।
मंगलाष्टक के अंतिम श्लोक के उच्चारण के साथ ही दोनों विग्रहों के मध्य रखा हुआ 'अंतरपट' (पर्दा) हटा लिया जाता है, जो विवाह की औपचारिक घोषणा का प्रतीक है।





