विस्तृत उत्तर
रुद्राष्टाध्यायी का द्वितीय अध्याय 'पुरुष सूक्त' है, जिसके देवता विष्णु हैं।
इसमें १६ मन्त्र हैं जो 'सहस्रशीर्षा पुरुषः' से आरंभ होते हैं। यह अनंत सिर, आँख और पैरों वाले विराट पुरुष (महानारायण) का वर्णन करता है, जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड और वेदों की उत्पत्ति हुई।





