📖
विस्तृत उत्तर
महातल का भगवान नारायण से संबंध उनके विराट रूप के अंग के रूप में है। सनातन दर्शन में संपूर्ण ब्रह्मांड को भगवान श्रीहरि विष्णु के विराट रूप के रूप में देखा गया है। चौदह लोक उनके शरीर के विभिन्न अंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। महातल भगवान के दोनों गुल्फों, अर्थात टखनों, में स्थित बताया गया है। यह सिद्ध करता है कि चाहे लोक स्वर्ग हो या पाताल, देवता हों या नाग, सभी उसी एक परम सत्य नारायण के शरीर के अंश हैं और कोई भी भगवान की सत्ता से बाहर नहीं है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





