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विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान के विराट रूप में सभी लोकों को उनके अलग-अलग अंगों के रूप में बताया गया है। विराट पुरुष की नाभि में भुवर्लोक, हृदय में स्वर्लोक और वक्षस्थल में महर्लोक का स्थान बताया गया है। महर्लोक से ऊपर, वक्षस्थल के अग्रभाग से ग्रीवा तक के पवित्र क्षेत्र में जनलोक और तपोलोक स्थित हैं। विराट पुरुष का मस्तक सत्यलोक या ब्रह्मलोक माना गया है। एक अन्य प्रसंग में विराट पुरुष के मुख को जनलोक या वरुण का लोक भी कहा गया है।
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