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विस्तृत उत्तर
विराट पुरुष की नाभि में भुवर्लोक, हृदय में स्वर्लोक और वक्षस्थल में महर्लोक बताया गया है। वक्षस्थल के अग्रभाग से ग्रीवा तक के पवित्र क्षेत्र में जनलोक और तपोलोक स्थित हैं। विराट पुरुष का मस्तक सत्यलोक या ब्रह्मलोक माना गया है। इस प्रकार ऊर्ध्व लोकों को विराट पुरुष के ऊपरी अंगों में रखा गया है, जो चेतना के आरोहण और आध्यात्मिक ऊँचाई का प्रतीक है।
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