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विस्तृत उत्तर
भागवत पुराण के एक प्रसंग में विराट पुरुष के मुख को जनलोक या वरुण का लोक कहा गया है। जनलोक का संबंध वाणी, वेद-मंत्रों और परब्रह्म के गुणगान से है। यहाँ रहने वाले सिद्ध पुरुष वाणी के माध्यम से केवल परब्रह्म का गुणगान और वेद-मंत्रों का उद्घोष करते हैं। इसी कारण जनलोक का स्थान विराट पुरुष के कंठ और मुख से जोड़ा गया है।
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