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विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार ब्रह्मांड के लोक भगवान के विराट स्वरूप के अंगों के रूप में स्थित हैं। विराट पुरुष के कटि भाग से नीचे सात अधोलोक स्थित हैं। मध्य लोकों में भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक भगवान की नाभि तक के क्षेत्र में माने गए हैं। ऊर्ध्व लोकों का वर्णन करते हुए कहा गया है कि विराट पुरुष के वक्षस्थल के ऊपरी भाग से लेकर ग्रीवा तक के स्थान में जनलोक और तपोलोक स्थित हैं, जबकि सबसे शीर्ष पर सत्यलोक, अर्थात ब्रह्मा का धाम, उनके मस्तक पर सुशोभित है।
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