विस्तृत उत्तर
रुद्राष्टाध्यायी का प्रथम अध्याय 'शिवसंकल्प सूक्त' है, जिसके देवता मन और गणेश हैं।
इस अध्याय में भगवान गणेश की स्तुति 'गणानां त्वा गणपति गुम हवामहे' से प्रारंभ होती है। मुख्य मन्त्र 'तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु' (मेरा मन कल्याणकारी शुभ संकल्पों वाला हो) है।
यह अध्याय जाग्रत और सुषुप्त अवस्था में मन को नियंत्रित करता है।




