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गणेश पूजा📜 शिव पुराण, गणेश पुराण, पौराणिक कथा2 मिनट पठन

गणेश जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

पौराणिक कथा: बालक गणेश ने माता पार्वती देखकर पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया (शिव प्रसन्नता हेतु) — शिव-पार्वती प्रसन्न, परंपरा आरंभ। अन्य: सिंदूर = शक्ति/शुभता। गणेश = मूलाधार चक्र अधिपति (लाल रंग)। शुद्ध सिंदूर ललाट + उदर पर लगाएं।

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विस्तृत उत्तर

गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा पौराणिक कथा पर आधारित है:

पौराणिक कथा

एक बार माता पार्वती अपनी मांग में सिंदूर भर रही थीं। बालक गणेश ने पूछा: 'माता, यह क्या लगा रही हैं?' पार्वती ने कहा: 'सिंदूर — यह सौभाग्य का प्रतीक है और इसे लगाने से तुम्हारे पिता शिव प्रसन्न होते हैं।' यह सुनकर बालक गणेश ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया — यह सोचकर कि इससे पिता और भी प्रसन्न होंगे। उनके इस भोलेपन से शिव-पार्वती दोनों प्रसन्न हुए और तभी से गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा आरंभ हुई।

अन्य कारण

  1. 1शक्ति और ऊर्जा: सिंदूर (लाल रंग) = शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक। गणेश शक्ति (शिव-पार्वती के पुत्र) का प्रतीक।
  2. 2मांगलिक प्रतीक: सिंदूर = शुभता और मंगल। गणेश = मंगलमूर्ति।
  3. 3मूलाधार चक्र: लाल रंग मूलाधार चक्र का रंग है। गणेश मूलाधार चक्र के अधिपति देवता माने गए हैं।

सिंदूर अर्पण विधि

  • शुद्ध सिंदूर (बिना रासायनिक) प्रयोग करें।
  • गणेश प्रतिमा के ललाट और उदर पर लगाएं।
  • 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलते हुए लगाएं।
  • प्रसाद रूप में सिंदूर अपने ललाट पर भी लगाएं।
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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, गणेश पुराण, पौराणिक कथा
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