विस्तृत उत्तर
गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा पौराणिक कथा पर आधारित है:
पौराणिक कथा
एक बार माता पार्वती अपनी मांग में सिंदूर भर रही थीं। बालक गणेश ने पूछा: 'माता, यह क्या लगा रही हैं?' पार्वती ने कहा: 'सिंदूर — यह सौभाग्य का प्रतीक है और इसे लगाने से तुम्हारे पिता शिव प्रसन्न होते हैं।' यह सुनकर बालक गणेश ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया — यह सोचकर कि इससे पिता और भी प्रसन्न होंगे। उनके इस भोलेपन से शिव-पार्वती दोनों प्रसन्न हुए और तभी से गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा आरंभ हुई।
अन्य कारण
- 1शक्ति और ऊर्जा: सिंदूर (लाल रंग) = शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक। गणेश शक्ति (शिव-पार्वती के पुत्र) का प्रतीक।
- 2मांगलिक प्रतीक: सिंदूर = शुभता और मंगल। गणेश = मंगलमूर्ति।
- 3मूलाधार चक्र: लाल रंग मूलाधार चक्र का रंग है। गणेश मूलाधार चक्र के अधिपति देवता माने गए हैं।
सिंदूर अर्पण विधि
- ▸शुद्ध सिंदूर (बिना रासायनिक) प्रयोग करें।
- ▸गणेश प्रतिमा के ललाट और उदर पर लगाएं।
- ▸'ॐ गं गणपतये नमः' बोलते हुए लगाएं।
- ▸प्रसाद रूप में सिंदूर अपने ललाट पर भी लगाएं।





