विस्तृत उत्तर
गणेश जी का अभिषेक उनकी पूजा का महत्वपूर्ण अंग है। गणपति अथर्वशीर्ष में कहा गया: 'अनेन गणपतिमभिषिञ्चति स वाग्मी भवति' — इस मंत्र से गणपति का अभिषेक करने वाला कुशल वक्ता होता है।
अभिषेक विधि
1तैयारी
- ▸गणेश प्रतिमा/मूर्ति को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें।
- ▸ताम्बे या कांसे का पात्र (अभिषेक पात्र) नीचे रखें।
2अभिषेक क्रम (पंचामृत)
- ▸दूध — 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलते हुए
- ▸दही — मंत्र सहित
- ▸घी — मंत्र सहित
- ▸शहद — मंत्र सहित
- ▸शर्करा (चीनी) — मंत्र सहित
3जलाभिषेक
- ▸पंचामृत के बाद शुद्ध जल (गंगाजल सर्वोत्तम) से अभिषेक।
4विशेष अभिषेक सामग्री
- ▸गन्ने का रस, नारियल जल, पंचगव्य (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही, घी)
5अभिषेक पश्चात
- ▸मूर्ति को स्वच्छ वस्त्र से पोंछें।
- ▸सिंदूर/कुमकुम तिलक लगाएं।
- ▸दूर्वा (दूब घास) अर्पित करें — गणेश को अत्यंत प्रिय।
- ▸मोदक/लड्डू का भोग लगाएं।
अभिषेक का फल: वाक् शक्ति (अथर्वशीर्ष), बुद्धि वृद्धि, विघ्न नाश, ग्रह शांति।
तुलसी वर्जित: गणेश पूजा में तुलसी का प्रयोग निषिद्ध माना गया है।





