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गणेश पूजा⏱ 2 मिनट पठन

गणेश पूजा में अभिषेक की विधि क्या है?

अथर्वशीर्ष: 'अभिषेक से वाग्मी होता है। ' विधि: पंचामृत (दूध→दही→घी→शहद→शर्करा) + गंगाजल, 'ॐ गं गणपतये नमः' सहित। पश्चात: सिंदूर तिलक, दूर्वा, मोदक भोग। तुलसी वर्जित।

संक्षिप्त उत्तर

अथर्वशीर्ष: 'अभिषेक से वाग्मी होता है।' विधि: पंचामृत (दूध→दही→घी→शहद→शर्करा) + गंगाजल, 'ॐ गं गणपतये नमः' सहित। पश्चात: सिंदूर तिलक, दूर्वा, मोदक भोग। तुलसी वर्जित। फल: वाक्शक्ति, बुद्धि, विघ्न नाश।

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विस्तृत उत्तर

गणेश जी का अभिषेक उनकी पूजा का महत्वपूर्ण अंग है। गणपति अथर्वशीर्ष में कहा गया: 'अनेन गणपतिमभिषिञ्चति स वाग्मी भवति' — इस मंत्र से गणपति का अभिषेक करने वाला कुशल वक्ता होता है।

अभिषेक विधि

1तैयारी

  • ▸गणेश प्रतिमा/मूर्ति को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें।
  • ▸ताम्बे या कांसे का पात्र (अभिषेक पात्र) नीचे रखें।

2अभिषेक क्रम (पंचामृत)

  • ▸दूध — 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलते हुए
  • ▸दही — मंत्र सहित
  • ▸घी — मंत्र सहित
  • ▸शहद — मंत्र सहित
  • ▸शर्करा (चीनी) — मंत्र सहित

3जलाभिषेक

  • ▸पंचामृत के बाद शुद्ध जल (गंगाजल सर्वोत्तम) से अभिषेक।

4विशेष अभिषेक सामग्री

  • ▸गन्ने का रस, नारियल जल, पंचगव्य (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही, घी)

5अभिषेक पश्चात

  • ▸मूर्ति को स्वच्छ वस्त्र से पोंछें।
  • ▸सिंदूर/कुमकुम तिलक लगाएं।
  • ▸दूर्वा (दूब घास) अर्पित करें — गणेश को अत्यंत प्रिय।
  • ▸मोदक/लड्डू का भोग लगाएं।

अभिषेक का फल: वाक् शक्ति (अथर्वशीर्ष), बुद्धि वृद्धि, विघ्न नाश, ग्रह शांति।

तुलसी वर्जित: गणेश पूजा में तुलसी का प्रयोग निषिद्ध माना गया है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

गणेश पूजा में अभिषेक की विधि क्या है को संदर्भ सहित समझें

गणेश पूजा में अभिषेक की विधि क्या है का सबसे सीधा सार यह है: अथर्वशीर्ष: 'अभिषेक से वाग्मी होता है।' विधि: पंचामृत (दूध→दही→घी→शहद→शर्करा) + गंगाजल, 'ॐ गं गणपतये नमः' सहित। पश्चात: सिंदूर तिलक, दूर्वा, मोदक भोग। तुलसी वर्जित। फल: वाक्शक्ति, बुद्धि, विघ्न...

गणेश पूजा जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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