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विस्तृत उत्तर
योग शुरू करने से पहले गुरु, शिव, पार्वती, गणेश और शिष्यों सहित योगीश्वरों को प्रणाम करना चाहिए। पाठ में कहा गया है कि दिव्य और स्वच्छ स्थान में ठीक आसन से बैठकर प्रसन्नतापूर्वक योग के अंगों का अभ्यास करें। उसके बाद इन सबको प्रणाम करके स्वस्तिक या अर्ध पद्मासन, जिसे सिद्धासन कहा गया है, बाँधकर योगी को योग-साधना में प्रवृत्त होना चाहिए।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 50, श्लोक 83-86
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