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योग अभ्यास📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 49, श्लोक 75-78⏱ 1 मिनट पठन

योगी को पाप, विषय और काम-क्रोध कैसे दूर करने चाहिए?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

योगी को प्राणायाम से दोष, धारणा से पाप, प्रत्याहार से विषय, ध्यान से अनीश्वर गुण और समाधि से बुद्धि की वृद्धि करनी चाहिए।

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विस्तृत उत्तर

योगी को पाप, विषय और काम-क्रोध आदि को योग के अंगों से दूर करना चाहिए। पाठ में कहा गया है कि प्राणायाम से सभी दोषों को दग्ध करना चाहिए। धारणा से पापों को और प्रत्याहार से विषयों को विष समझकर जला देना चाहिए। ध्यान से काम-क्रोध आदि अनीश्वर गुणों को जलाना चाहिए और समाधि से बुद्धि की वृद्धि करनी चाहिए। इसके लिये उचित स्थान, आसन और क्रम से अष्टांग योग का अभ्यास आवश्यक है।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 49, श्लोक 75-78
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

योगी को पाप, विषय और काम-क्रोध कैसे दूर करने चाहिए को संदर्भ सहित समझें

योगी को पाप, विषय और काम-क्रोध कैसे दूर करने चाहिए का सबसे सीधा सार यह है: योगी को प्राणायाम से दोष, धारणा से पाप, प्रत्याहार से विषय, ध्यान से अनीश्वर गुण और समाधि से बुद्धि की वृद्धि करनी चाहिए।

योग अभ्यास जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 49, श्लोक 75-78 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 49, श्लोक 75-78 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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