लोकमहर्लोक में अष्टसिद्धियों की क्या भूमिका है?महर्लोक के निवासियों के पास अणिमा, महिमा आदि अष्टसिद्धियाँ हैं जिनसे वे ब्रह्मांड के किसी भी लोक में मन की गति से जा सकते हैं। प्रलय में ये सिद्धियाँ ही उन्हें जनलोक भेजती हैं।#अष्टसिद्धि#महर्लोक#अणिमा
लोकअव्यक्त अस्त्र योगियों के लिए मित्र क्यों है?क्योंकि यह योगियों के लिए मोक्ष का प्रतीक है।#अव्यक्त अस्त्र#योगी#मोक्ष
लोकविष्णु पुराण में योगी भोजन का फल क्या है?हजार ब्राह्मण भोजन जैसा पुण्य।#विष्णु पुराण#योगी#श्राद्ध भोज
लोकअग्निष्वात्त पितर कौन हैं?योगी और तपस्वी पितरों की अमूर्त श्रेणी अग्निष्वात्त है।#अग्निष्वात्त#अमूर्त पितर#योगी
श्राद्ध दर्शनश्राद्ध में हव्य-कव्य किसे देना चाहिए?श्राद्ध में हव्य-कव्य का दान भगवान के भक्तों, ज्ञाननिष्ठ ब्राह्मणों या योगियों को ही देना चाहिए। हव्य का अर्थ है देवताओं को अर्पित और कव्य का अर्थ है पितरों को अर्पित पदार्थ। साधारण लोगों को नहीं, बल्कि वास्तव में आध्यात्मिक रूप से सक्षम व्यक्तियों को ही दान मिलना चाहिए।#हव्य कव्य दान#भगवान के भक्त#ज्ञाननिष्ठ ब्राह्मण
लोकयमपुरी का पूर्व द्वार किन योगियों के लिए है?पूर्व द्वार सिद्ध योगियों, ऋषियों, ज्ञानियों और संबुद्ध आत्माओं के लिए है, जिनका पुष्पवर्षा से स्वागत होता है।#यमपुरी पूर्व द्वार#योगी#ऋषि
लोकजनलोक तक कौन पहुँच सकता है?जनलोक निष्काम योगियों, सिद्धों, सन्यासियों और नैष्ठिक ब्रह्मचारियों को प्राप्त होता है।#जनलोक प्राप्ति#योगी#सिद्ध
लोकतपोलोक को तपस्या का लोक क्यों कहा जाता है?क्योंकि यह निष्काम तपस्वियों, सिद्ध योगियों और वैराज देवगणों का नित्य निवास स्थान है।#तपोलोक#तपस्या#तपस्वी
लोकतपोलोक में कौन निवास करता है?तपोलोक में वैराज देवगण, सिद्ध तपस्वी, महान मुनि और योगी निवास करते हैं।#तपोलोक निवासी#वैराज देवगण#तपस्वी
लोकसंकर्षण की अग्नि और सत्यलोक का क्या संबंध है?संकर्षण की अग्नि नैमित्तिक प्रलय में त्रैलोक्य को जलाती है और महर्लोक तक पहुँचती है — पर सत्यलोक इससे पूर्णतः सुरक्षित रहता है। योगी इस समय सत्यलोक में शरण लेते हैं।#संकर्षण#अग्नि#सत्यलोक
रामचरितमानस — बालकाण्डकामदहन के बाद जगत में क्या प्रभाव पड़ा?चार प्रभाव — (1) देवता डर गये (शिवपुत्र बिना तारकासुर नहीं मरेगा), (2) असुर सुखी हुए, (3) भोगी चिन्तित हुए कामसुख याद कर, (4) साधक-योगी निष्कंटक (काम-बाधा से मुक्त) हो गये।#बालकाण्ड#कामदहन प्रभाव#देवता